दुनिया के इतिहास में अर्नेस्टो चे ग्वेरा ( Ernesto Che गुवारा ) का नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित है । इनके फैन्स सिर्फ अमेरिका या अफ्रीका में ही नहीं बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया में आज भी हैं । वह छात्रों-युवाओं के बीच एक फैशन आइकन के तौर पर भी जाने जाते हैं । वे नेहरू को अपना हीरो मानते थे।
महान क्रांतिकारी अर्नेस्तो ‘ चे ‘ गेवारा ( Ernesto ‘ Che ‘ Guevara ) के भारत दौरे के बारे में उनके सहयोगी पार्दो लादा लिखते हैं — ‘ चे के ‘ नायक ‘ रहे नेहरू के साथ उनकी मुलाकात दोपहर के शानदार खाने पर हुई । ‘ तीन-मूर्ति भवन ‘ में खाने की मेज पर इंदिरा गांधी और उनके बच्चे राजीव और संजय भी मौजूद थे ।
पार्दो कहते हैं – ‘ चे नेहरू से चीन और माओ के बारे में सवाल पूछते रहे और नेहरू उन गंभीर सवालों को नितांत अनसुना करते हुए मेज पर सजे पकवानों-फलों की बात करते रहे । चे गेवारा ने प्रधानमंत्री नेहरू को क्यूबा के सिगार का डिब्बा भेंट किया । धूमपान के शौकीन नेहरू के चेहरे पर मुस्कान फैल गयी ।
पंडित नेहरू ने लड़ाके ‘ चे ‘ गेवारा को कटारी भेंट की थी । अपने भारत दौरे से लौटने के बाद चे ने एक रिपोर्ट फिदेल कास्त्रो के सुपुर्द की थी । साप्ताहिक ‘ वेरदे ओलिवो ‘ के 12 अक्तूबर, 1959 के अंक में वह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई ।
उसके मुताबिक चे गेवारा ने भारत को तटस्थ नजरिए से देखा । भारत की सामाजिक विषमताओं के साथ प्रगति की ललक को समझने की कोशिश की । अपनी तीन पृष्ठ की उस रिपोर्ट में चे ने ‘ विरोधाभासों के देश ‘ भारत के ‘औद्योगिक विकास ‘ और ‘ भयानक दरिद्रता ‘ के बीच खाई वाले ‘ विचित्र और जटिल परिदृश्य ‘ के साथ विकास में आए ‘असाधारण सामाजिक महत्व के ‘ अभिनव परिवर्तन ‘ को लक्ष्य किया । उन्होंने ‘ कृषि-सुधार ‘ की तकनीकों पर न केवल ध्यान दिया भारत और क्यूबा के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को ‘ एक-सा’ करार देते हुए ‘ दो उद्योगशील ‘ देशों की ‘ साथ-साथ ‘ उन्नति की संभावना भी व्यक्त की ।
दुनिया के इतिहास में अर्नेस्टो चे ग्वेरा ( Ernesto Che गुवारा ) का नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित है । इनके फैन्स सिर्फ अमेरिका या अफ्रीका में ही नहीं बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया में आज भी हैं । वह छात्रों-युवाओं के बीच एक फैशन आइकन के तौर पर भी जाने जाते हैं ।
दरअसल चे एक क्रांतिकारी थे । जिन्होंने क्रांति क्यूबा (Cuba) में की और अपनी शहादत बोलीविया में हासिल की । उनका जन्म 14 जून 1928 को अर्जेंटीना (Argentina) रोसारियो में हुआ था । उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की और डॉक्टर बने ।
1950 के दशक में, चे ग्वेरा क्यूबा के पूर्व प्रधानमंत्री फिदेल कास्त्रो ( Fidel Castro) और दूसरे क्रांतिकारियों से मिले और क्यूबा की क्रांति में शामिल हो गये । उन्होंने गुरिल्ला युद्ध में अहम भूमिका निभाई, जिससे 1959 में क्यूबा में बतिस्ता सरकार का पतन हुआ । इस क्रांति के बाद ही क्यूबा में फिदेल कास्त्रो ने समाजवाद की स्थापना की थी और वहां के प्रधानमंत्री बने थे । 1976 में वह क्यूबा के राष्ट्रपति बने ।
चे को दक्षिण अमेरिका में गुरिल्ला युद्ध के लिए भी याद किया जाता है । क्यूबा की क्रांति के प्रमुख नायकों में चे का नाम भी इतिहास में दर्ज है । उन्हें शोषण-उत्पीड़न और साम्राज्यवाद विरोध के लिए जाना जाता है ।
चे ग्वेरा अपने 5 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे । चे की मां सेलिया एक राजनीतिक कार्यकर्ता थीं । चे ने कई राजनीतिक किताबों को बचपन में ही पढ़ लिया था । उन्होंने मार्क्स और लेनिन के अलावा गौतम बुद्ध, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की जीवनी भी पढ़ी । अपनी भारत यात्रा के दौरान चे ने जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात भी की थी ।
महान क्रांतिकारी अर्नेस्तो ‘ चे ‘ गेवारा
जन्मदिन : 14 जून ( 1928 )
नेहरू रिव्यू से साभार
