जो लोग एक अच्छा संस्थान नहीं बना पाए, वे भोपाल की उस महान हस्ती के नाम से बनी यूनिवर्सिटी का नाम बदल रहे हैं जिसने आज़ाद हिंद फौज से बहुत पहले एक निर्वासित सरकार बनाई थी। जो लोग एक अच्छा संस्थान नहीं बना पाए, वे भोपाल की उस महान हस्ती के नाम से बनी यूनिवर्सिटी […]
Read More
21 अप्रैल 1956 को नेहरू न सिर्फ IIT खड़गपुर से पास हुए देश के पहले 150 इंजीनियर्स के दीक्षांत समारोह में पहुंचे तो उनसे कोई बांध या पुल बनाने की बात नहीं कर रहे थे. नेहरू कह रहे थे कि बहुत नाजुक वक्त है, बड़े बदलाव का वक्त है. हमें इस वक्त में इस मुल्क […]
Read More
नेहरू के नेतृत्व में राजशाही और सामंतशाही को नेस्तनाबूद कर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का पौधा भारत भूमि पर रोपा गया और हर आशंका को ध्वस्त कर विकसित हुआ। नेहरू ने जो बीज बोया, वो आज वटवृक्ष है। कल 27 मई की ही तारीख थी, जब सन् 1964 में हमने आधुनिक भारत शिल्पी पं.नेहरू […]
Read More
इस किताब को पढनें के बाद मुझे गांधीजी के और तुम्हारे अहिंसक और असहयोग से प्रभावित आज़ादी के आंदोलन को समझने में बहुत मदद मिली है. प्रिय नेहरू,मैंने तुम्हारी अद्भुत किताब”दी डिस्कवरी ऑफ इंडिया” दिलचस्पी के साथ पढ़ी.एक पश्चिमी देश के निवासी के लिए तुम्हारी पुस्तक का पहला आधा हिस्सा समझ के बाहर है.परन्तु किताब […]
Read More
आज नेहरू की पुण्यतिथि है, हमे पता है उन्हें याद करने में बहुतों की साँस फूलने लगेगी।हर वोह व्यक्ति उन्हें याद करने में कतराएगा जो अपने धर्म के तो करीब है मगर इस मिट्टी से दूर है। ऐसा शख्स जिसने कभी बहाने नही बनाए,अपनी ज़िम्मेदारी किसी दूसरे के कन्धे पर नही डाली ।जब दो टुकड़ों […]
Read More
एक ही परिवार के कई सदस्य देश की आज़ादी के लिए जेल गए, आंदोलन किए और अपना जीवन दांव पर लगाया, तो क्या उसे भी “परिवारवाद” कहा जाएगा या फिर राष्ट्र के प्रति समर्पण? भारतीय राजनीति में जब भी “परिवारवाद” का मुद्दा उठता है, तब सबसे पहले नेहरू-गांधी परिवार को निशाने पर लिया जाता है। […]
Read More
आसफ अली भगत सिंह के न्यायिक परामर्शदाता रहे । भगत सिंह के साथ केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने वाले बटुकेश्वर दत्त का भी न्यायालय में पक्ष उन्होंने ही रखा । ब्रिटिश न्यायालय में शहीद – ए – आजम भगत सिंह की पैरवी अधिवक्ता आसफ अली ने ही की थी । आसफ अली भगत सिंह के […]
Read More
अंग्रेजों के खिलाफ जो संगठित पहला विद्रोह भड़का वह 10 मई 1857 था ,जो बाद में जनव्यापी क्रांति बन गया ।19वीं सदी के पहले 5 दशकों में कई जनजाति विद्रोह भी हुए लेकिन इन सभी आंदोलनों का प्रभाव क्षेत्र बहुत सीमित था। 0 मई 1857 : इत्तेफ़ाक से यही तारीख थी जब मेरठ में विद्रोही […]
Read More
जन्मदिन : 7 मई ( 1861) पर: टैगोर लिखते हैं, “देशभक्ति हमारा आखिरी आध्यात्मिक सहारा नहीं बन सकता, मेरा आश्रय मानवता है । मैं हीरे के दाम में ग्लास नहीं खरीदूंगा और जब तक मैं जिंदा हूं मानवता के ऊपर देशभक्ति की जीत नहीं होने दूंगा । ..’ पंडित जवाहरलाल नेहरू पर रबींद्रनाथ टैगोर का […]
Read More
सत्ता प्रतिष्ठान का सिनेमा होने के बजाय ये फिल्में नेहरूवादी राज्य में सामाजिक असमानताओं की आलोचना भी थीं जिसे पंडित नेहरू ‘ प्रमोट ‘ कर रहे थे । पंडित नेहरू यानी वह विश्व राजनेता जिसे अपनी आलोचना पसंद थी । पंडित नेहरू ने फिल्म ‘ पथेर पांचाली ‘ के जरिए न केवल नव-यथार्थवाद ( Neorealism […]
Read More