असल बात यह है कि भारत विभिन्न संस्कृतियों और जीवन पद्धतियों का देश है, जो उत्तर भारत के लिये पूज्य है, वह पूर्वोत्तर में भक्ष्य है। लेकिन भाजपा सच्चाई नहीं बोल सकती क्योंकि उसकी मंशा गोरक्षा की नहीं गो-राजनीति की है। भाजपा और संघ वाले अक्सर ऊंची आवाज में गोकशी के खिलाफ नारा बुलंद करते […]
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कोलकाता मेट्रो की कहानी कुछ ऐसी है कि जैसे किसी शहर के सपने को पहली बार पटरियों पर रखा गया हो, और उस सपने की नींव 29 दिसंबर 1972 को पड़ी, जब इंदिरा गांधी की सरकार ने आधिकारिक रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया। कोलकाता मेट्रो की कहानी कुछ ऐसी है कि जैसे किसी […]
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वेनेजुएला के राष्ट्राध्यक्ष को अमरीका उठा कर ले आयी, और तख्ता-पलट की योजना बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ऐसी क्षमता किसी अन्य देश में नहीं। इससे एक कहानी याद आयी, जो भारत से जुड़ी है, नेहरू से जुड़ी है और सकारात्मक रूप में जुड़ी है। अगर एक नाम आप नेपाल में कई […]
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1955 में लाल किले से पंडित नेहरू ने कहा: आज हम आजादी की आठवीं वर्षगांठ मना रहे हैं और दुनिया देखे कि हमने इन 8 वर्षों में कितने सब्र से काम लिया किस कदर रोकथाम की क्योंकि हम चाहते थे और हम चाहते हैं कि यह गोवा का सवाल सब्र और बाअमन तरीके से हल […]
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नेहरू ने आइएनए डिफेंस कमेटी बनाई. इस कमेटी ने देश भर से आइएनए के सैनिकों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा किया. इस कमेटी में देश के नामी वकील शामिल किए गए. इस समय तक देश में नारे लगने लगे: ‘‘चालीस करोड़ की ये आवाज, सहगल, ढिल्लन, शाहनवाज.’’ भारत की निर्वासित सरकार की स्थापना नेताजी […]
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लाल बहादुर शास्त्री ने अक्षय ब्रह्मचारी से बाबरी मस्जिद के रीस्टोरेशन का वादा किया था जिसे राजनाथ सिंह और दैनिक जागरण ने पंडित नेहरू द्वारा सरकारी ख़र्च से मस्जिद के पुनर्निर्माण में बदल दिया। पूरी सच्चाई क्या है पढ़ें : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि पंडित नेहरू सरकारी […]
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एक खास नज़रिए से पटेल की तरफ से अनकही बातों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जरूरत है दोनों के बीच पत्राचार को प्रस्तुत किया जाय। इसी क्रम में आज एक लेख जिसे पटेल ने लिखा है, प्रस्तुत है। मतभिन्नता को स्वीकार करना, उसे आदर देना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान होती है। मतभिन्नता कांग्रेस की […]
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नेहरू के लिए राष्ट्रवाद गाल बजाने वाला जुमला नहीं, बल्कि उस जमाने के 35-40 करोड़ लोगों का खुशहाल वजूद ही उनका राष्ट्रवाद था. इन सारे लोगों का खुशहाली से जीना और एक साथ आगे बढ़ना ही उनके लिए असली आजादी थी. नेहरू का देश चलाने का यह तरीका नहीं था. उनकी आजादी की परिभाषा इतनी […]
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पंडित राजकौल 1716 में बादशाह फ़र्रूख़सियर के बुलाने पर सपरिवार दिल्ली आ गए और शाही परिवार के बच्चों को फ़ारसी पढ़ाने लगे। बादशाह ने उन्हें रहने के लिए हवेली दी । यह हवेली उस नहर के किनारे थी जिस नहर से जमुना नदी से पानी लाल किले में लाया जाता था। जब बादशाह फ़र्रूख़सियर सन […]
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