चंद्रशेखर आजाद के सहयोगी क्रांतिकारी और हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार यशपाल ने अपनी आत्मकथा सिंहावलोकन में इस घटना का वर्णन किया है। वे लिखते है कि मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल क्रांतिकारियों की अक्सर आर्थिक मदद करते रहते थे। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस और क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बीच मुठभेड़ चल रही थी। दोनों […]
Read More
सन 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध चल रहा था।इंदिरा गांधी ने अपने निजी सोने के गहने राष्ट्र को समर्पित करने का निर्णय लिया और अपना गहनों का डिब्बा आधिकारिक तौर पर नेशनल डिफेंस फंड में जमा करा दिया। सन 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध चल रहा था और देश […]
Read More
जलियांवाला बाग व नमक की जादुई शक्ति ने पूरे नेहरू परिवार को गांधीजी का सत्याग्रही बना दिया।उस एक घटना ने मोतीलाल जी की सोच को जड़ से बदल दिया। गांधी के कट्टर आलोचक रहे मोतीलाल अब उनके सबसे बड़े समर्थक बन गए। यह केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि पूर्ण जीवन-शैली का रूपांतरण था। इतिहास की […]
Read More
हाल-हाल तक भारत की राजनीति की यह तहजीब रही कि नेता पर्सनल रिश्तों को उछालने से बचते थे. कांग्रेस ने कभी न अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तों पर सवाल उठाया, न जार्ज फर्नांडीज के रिश्तों पर. चचेरे-ममेरे भाई बहनों के बीच प्रेम या विवाह उत्तर भारतीय हिंदू समाज की नैतिकता में भले ही फिट नहीं […]
Read More
नेहरू ने उस दौर में जो गुटनिरपेक्षता की नींव रखी थी, उसका सबसे बड़ा इम्तिहान स्वेज की लहरों में ही हुआ था।स्वेज संकट के बाद नासिर ने दुनिया से कहा था ” इजिप्ट के पास अपनी सेना है, लेकिन भारत के पास दुनिया का विवेक Conscience है।” Paw Paw ने तो कोई वॉर नहीं रुकवाई […]
Read More
सुभाष उन नेताओं में थे, जिन्होंने महात्मा गांधी को हमेशा पूरा आदर दिया. वो ऐसे पहले शख्स भी थे, जिन्होंने गांधीजी को राष्ट्रपिता कहा. उन्होंने हर विदेशी मंच पर गांधी को पूरा सम्मान दिया. वो जहां कहीं भी रहे, गांधी के लिए अवनत रहे. उन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा और गांधी और नेहरू के […]
Read More
डॉ. रेवरेंड मॉट ने पूछा— “मि. गांधी! आपके सार्वजनिक जीवन में आपको आशा और निराशा दोनों मिली होंगी। आपको किस बात ने सबसे अधिक निराश किया?”गांधी जी का अंग्रेजी में उत्तर छोटा लेकिन मर्मभेदी था: “The iron-like hearts of the educated Indians”. “शिक्षित भारतीयों के लोहे जैसे कठोर हृदय।” महात्मा गांधी और डॉ जान रेवरेंड […]
Read More
BHU का यह समारोह गांधी के उस एक वर्ष के मौन के बाद पहला बड़ा सार्वजनिक मंच था।1916 का वह पहला भाषण केवल एक वक्तव्य नहीं था, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अंत की घोषणा थी। जब गांधी ने बनारस में हिला दी थी ब्रिटिश साम्राज्य और राजशाही की नींव 14 जनवरी 1916; वाराणसी में पतित-पावनी […]
Read More
वेनेजुएला के राष्ट्राध्यक्ष को अमरीका उठा कर ले आयी, और तख्ता-पलट की योजना बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ऐसी क्षमता किसी अन्य देश में नहीं। इससे एक कहानी याद आयी, जो भारत से जुड़ी है, नेहरू से जुड़ी है और सकारात्मक रूप में जुड़ी है। अगर एक नाम आप नेपाल में कई […]
Read More
1955 में लाल किले से पंडित नेहरू ने कहा: आज हम आजादी की आठवीं वर्षगांठ मना रहे हैं और दुनिया देखे कि हमने इन 8 वर्षों में कितने सब्र से काम लिया किस कदर रोकथाम की क्योंकि हम चाहते थे और हम चाहते हैं कि यह गोवा का सवाल सब्र और बाअमन तरीके से हल […]
Read More