गुटनिरपेक्षता की शुरुआती व्यावहारिक परीक्षा वास्तव में कोरिया में ही हुई, और भारत ने नेहरू के नेतृत्व में यह साबित किया कि बिना किसी पक्ष की जेब में गए भी एक देश अंतरराष्ट्रीय शांति में ठोस और निर्णायक योगदान दे सकता है। 1950 के दशक की शुरुआत में दुनिया एक ऐसे मोड़ पर थी, जहाँ […]
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