नेहरू के नाम आइंस्टाइन का पत्र

इस किताब को पढनें के बाद मुझे गांधीजी के और तुम्हारे अहिंसक और असहयोग से प्रभावित आज़ादी के आंदोलन को समझने में बहुत मदद मिली है.

प्रिय नेहरू,
मैंने तुम्हारी अद्भुत किताब”दी डिस्कवरी ऑफ इंडिया” दिलचस्पी के साथ पढ़ी.एक पश्चिमी देश के निवासी के लिए तुम्हारी पुस्तक का पहला आधा हिस्सा समझ के बाहर है.परन्तु किताब को पढनें से मुझे तुम्हारे देश की गौरवशाली बौद्धिक और आध्यात्मिक परम्पराओं को समझने का मौका मिला.तुमने अपनी किताब के दूसरे हिस्से में अपने देश के नैतिक और बौद्धिक पतन के कारणों का विश्लेषण किया है, तुमने ठीक ही लिखा है कि इसका मुख्य कारण अंग्रेजी साम्राज्य द्वारा तुम्हारे देश के लोगों का शैतानी से भरपूर शोषण है तुम्हारे इस विश्लेषण से मैं काफी हद तक प्रभावित हुआ हूँ I

“इस किताब को पढनें के बाद मुझे गांधीजी के और तुम्हारे अहिंसक और असहयोग से प्रभावित आज़ादी के आंदोलन को समझने में बहुत मदद मिली है.तानाशाही के दबाव,बाहरी और भीतरी बाधाओं तथा घृणा से पीड़ित होते हुए तुम्हारे संघर्ष नें दुनिया के इतिहास में एक अद्भुत स्थान बनाया है, मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ जो तुमने मुझे अपनी इस अद्भुत ऐतिहासिक खोज को समझने का मौका दिया I मेरी तुम्हारे महत्वपूर्ण कार्य के प्रति शुभकामना. तुम अपने महान कार्य में सफल हो,इसकी कामना भी अपनी प्यारी बेटी को मुझे याद करने को कहें” I

तुम्हारा,
अल्बर्ट आइंस्टाइन
प्रिंस्टन, न्यू जर्सी,यू एस ए
18 फरवरी 1950

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