नेहरू ने आइएनए डिफेंस कमेटी बनाई. इस कमेटी ने देश भर से आइएनए के सैनिकों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा किया. इस कमेटी में देश के नामी वकील शामिल किए गए. इस समय तक देश में नारे लगने लगे: ‘‘चालीस करोड़ की ये आवाज, सहगल, ढिल्लन, शाहनवाज.’’ भारत की निर्वासित सरकार की स्थापना नेताजी […]
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लाल बहादुर शास्त्री ने अक्षय ब्रह्मचारी से बाबरी मस्जिद के रीस्टोरेशन का वादा किया था जिसे राजनाथ सिंह और दैनिक जागरण ने पंडित नेहरू द्वारा सरकारी ख़र्च से मस्जिद के पुनर्निर्माण में बदल दिया। पूरी सच्चाई क्या है पढ़ें : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि पंडित नेहरू सरकारी […]
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एक खास नज़रिए से पटेल की तरफ से अनकही बातों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जरूरत है दोनों के बीच पत्राचार को प्रस्तुत किया जाय। इसी क्रम में आज एक लेख जिसे पटेल ने लिखा है, प्रस्तुत है। मतभिन्नता को स्वीकार करना, उसे आदर देना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान होती है। मतभिन्नता कांग्रेस की […]
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नेहरू के लिए राष्ट्रवाद गाल बजाने वाला जुमला नहीं, बल्कि उस जमाने के 35-40 करोड़ लोगों का खुशहाल वजूद ही उनका राष्ट्रवाद था. इन सारे लोगों का खुशहाली से जीना और एक साथ आगे बढ़ना ही उनके लिए असली आजादी थी. नेहरू का देश चलाने का यह तरीका नहीं था. उनकी आजादी की परिभाषा इतनी […]
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पंडित राजकौल 1716 में बादशाह फ़र्रूख़सियर के बुलाने पर सपरिवार दिल्ली आ गए और शाही परिवार के बच्चों को फ़ारसी पढ़ाने लगे। बादशाह ने उन्हें रहने के लिए हवेली दी । यह हवेली उस नहर के किनारे थी जिस नहर से जमुना नदी से पानी लाल किले में लाया जाता था। जब बादशाह फ़र्रूख़सियर सन […]
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by Chitra mali नेहरू के भारत विजन को लेकर अगर हम नए सिरे से विमर्श कर रहे हैं तो यह उनकी दूरदृष्टिता का ही कमाल है जो हमें सोचने के लिए एक नई और व्यापक दृष्टि प्रदान कर रहा है ।महात्मा गांधी ने 1929 में लाहौर में नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने से पहले […]
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Salil Desai Despite his incomparable contribution to the making of modern India, Jawaharlal Nehru is a much-reviled man today because of a deliberately twisted history peddled over the decades by right-wingers Yet, for someone like me, born in the late 1960s after Nehru died and thus untouched by his charisma but fairly well acquainted with […]
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हिंदुत्व ब्रिगेड ने एक तरह से उपनिवेशवादी विरोधी या सामाजिक गुलामी विरोधी प्रतीकों का रफ़्ता-रफ़्ता मामूलीकरण किया है या उन्हें बिल्कुल ही गायब कर दिया है। ख़बरों के मुताबिक इस बार 14 नवम्बर–जिसे हम जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के साथ जोड़ कर देखते आए थे – तमाम स्कूलों में बिल्कुल अलग ढंग से मनाया गया, […]
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