जब नेहरू ने चुनाव जल्दी कराने का दबाव डाला, तो सुकुमार सेन ने प्रधानमंत्री से साफ कहा कि उन्हें इंतज़ार करना होगा।इस टकराव से दोनों के बीच सम्मान का रिश्ता मजबूत हुआ नेहरू ने प्रशासनिक स्वायत्तता का सिद्धांत व्यवहार में लागू किया, और सेन ने साबित किया कि एक ईमानदार नौकरशाह लोकहित के लिए राजनीतिक […]
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असल बात यह है कि भारत विभिन्न संस्कृतियों और जीवन पद्धतियों का देश है, जो उत्तर भारत के लिये पूज्य है, वह पूर्वोत्तर में भक्ष्य है। लेकिन भाजपा सच्चाई नहीं बोल सकती क्योंकि उसकी मंशा गोरक्षा की नहीं गो-राजनीति की है। भाजपा और संघ वाले अक्सर ऊंची आवाज में गोकशी के खिलाफ नारा बुलंद करते […]
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कोलकाता मेट्रो की कहानी कुछ ऐसी है कि जैसे किसी शहर के सपने को पहली बार पटरियों पर रखा गया हो, और उस सपने की नींव 29 दिसंबर 1972 को पड़ी, जब इंदिरा गांधी की सरकार ने आधिकारिक रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया। कोलकाता मेट्रो की कहानी कुछ ऐसी है कि जैसे किसी […]
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गांधीजी जिस रास्ते पर चल रहे थे, वह सुपरमैन वाला रास्ता नहीं था, मसीहा वाला रास्ता था। जिस रास्ते में सिर्फ त्याग समर्पण और चेतना के विस्तार की ही गुंजाइश होती है, किसी तरह के चमत्कार की गुंजाइश नहीं होती। कई दिन से लगातार दिमाग में यह बात चल रही थी कि गांधीजी पर कुछ […]
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एक खास नज़रिए से पटेल की तरफ से अनकही बातों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जरूरत है दोनों के बीच पत्राचार को प्रस्तुत किया जाय। इसी क्रम में आज एक लेख जिसे पटेल ने लिखा है, प्रस्तुत है। मतभिन्नता को स्वीकार करना, उसे आदर देना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान होती है। मतभिन्नता कांग्रेस की […]
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पंडित राजकौल 1716 में बादशाह फ़र्रूख़सियर के बुलाने पर सपरिवार दिल्ली आ गए और शाही परिवार के बच्चों को फ़ारसी पढ़ाने लगे। बादशाह ने उन्हें रहने के लिए हवेली दी । यह हवेली उस नहर के किनारे थी जिस नहर से जमुना नदी से पानी लाल किले में लाया जाता था। जब बादशाह फ़र्रूख़सियर सन […]
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प्रकाशक तो निराला की किताबों को बेचकर अच्छा-ख़ासा धन कमा रहे, पर निराला मुफ़लिसी में जी रहे हैं। अतः अपने खत में नेहरू ने लिखा कि “निराला का उदाहरण प्रकाशकों द्वारा एक लेखक के शोषण का ज्वलंत उदाहरण हैं”। नेहरू ने अकादेमी से यह आग्रह भी किया कि वह कॉपीराइट कानून में कुछ ऐसे बदलाव […]
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by Vivek Kumar Srivastava Democracy requires the participation of all, none in the territory of the state can be ignored. There can be no difference between the majority and minority, and there will be no discrimination on the basis of races, caste, religion, gender etc. These elements constitute the philosophical basis of Indian democracy which […]
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…For the Congress is not an electioneering device, the Congress is not a mushroom party to run for an election. Elections will come and elections will go, but the Congress will go on because the Congress has its roots in generations of work and service, and trouble and travail – because the Congress has its […]
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It would be hard to overstate Nehru’s and India’s contributions. There was no moment in this period free from the peril of atomic war. In these years Nehru was a towering world force skillfully inserting the peace will of India between the raging antagonisms of the great powers of East and West. ” JAWAHARLAL NEHRU […]
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