क्या आप इन्हें जानते हैं? आगरा में जन्मी, स्वतंत्रता संग्राम की अग्रिम पंक्ति की योद्धा और नेहरू परिवार की सशक्त महिला उमा नेहरू का व्यक्तित्व कर्मठता और बौद्धिकता का अद्भुत संगम था। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर लोकसभा और राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने विविध विषयों पर अपनी गंभीर और सुविचारित राय रखकर अपनी अलग […]
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निशिकांत दुबे के भ्रामक आरोपों के संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष ने एक बार भी तथ्यों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल नहीं किया। विदित हो कि दुबे ने कहा कि “जब महात्मा गांधी का निधन हुआ तो जवाहरलाल नेहरू शोक मनाने के बजाय एडविना माउंटबेटन के साथ अकेले एक कमरे में थे।” कथित राष्ट्रवादी पार्टी का […]
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आज से 70 साल पहले देश का प्रधानमंत्री अपनी विफलताओं का जिम्मा अपने सर लेता था और देश की आवाम और देश की खुशहाली के लिए अपने आवास में खेती करवा रहा था इसके उलट आज आलीशान महल बनाए जा रहे हैं प्रधानमंत्री के निवास हेतु जबकि भारत आज भी भुखमरी के दलदल में धंसा […]
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राजा महेन्द्रप्रताप, मौलाना बरकतउल्ला के अलावा नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, एमएन राय, कर्मवीर पं. सुन्दर लाल, दुर्गा भाभी, दामोदर स्वरूप सेठ, कुमिल्ला में डीएम स्टीवेंस को उसके बंगले पर मारने वाली बंगाल की क्रांतिकारिणी शांति घोष, काकोरी केस के राजकुमार सिन्हा, झांसी बम कांड के लक्ष्मीकान्त शुक्ल, कानपुर के क्रांतिकारी नारायण प्रसाद अरोड़ा आदि […]
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चंद्रशेखर आजाद के सहयोगी क्रांतिकारी और हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार यशपाल ने अपनी आत्मकथा सिंहावलोकन में इस घटना का वर्णन किया है। वे लिखते है कि मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल क्रांतिकारियों की अक्सर आर्थिक मदद करते रहते थे। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस और क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बीच मुठभेड़ चल रही थी। दोनों […]
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सन 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध चल रहा था।इंदिरा गांधी ने अपने निजी सोने के गहने राष्ट्र को समर्पित करने का निर्णय लिया और अपना गहनों का डिब्बा आधिकारिक तौर पर नेशनल डिफेंस फंड में जमा करा दिया। सन 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध चल रहा था और देश […]
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जलियांवाला बाग व नमक की जादुई शक्ति ने पूरे नेहरू परिवार को गांधीजी का सत्याग्रही बना दिया।उस एक घटना ने मोतीलाल जी की सोच को जड़ से बदल दिया। गांधी के कट्टर आलोचक रहे मोतीलाल अब उनके सबसे बड़े समर्थक बन गए। यह केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि पूर्ण जीवन-शैली का रूपांतरण था। इतिहास की […]
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हाल-हाल तक भारत की राजनीति की यह तहजीब रही कि नेता पर्सनल रिश्तों को उछालने से बचते थे. कांग्रेस ने कभी न अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तों पर सवाल उठाया, न जार्ज फर्नांडीज के रिश्तों पर. चचेरे-ममेरे भाई बहनों के बीच प्रेम या विवाह उत्तर भारतीय हिंदू समाज की नैतिकता में भले ही फिट नहीं […]
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नेहरू ने उस दौर में जो गुटनिरपेक्षता की नींव रखी थी, उसका सबसे बड़ा इम्तिहान स्वेज की लहरों में ही हुआ था।स्वेज संकट के बाद नासिर ने दुनिया से कहा था ” इजिप्ट के पास अपनी सेना है, लेकिन भारत के पास दुनिया का विवेक Conscience है।” Paw Paw ने तो कोई वॉर नहीं रुकवाई […]
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सुभाष उन नेताओं में थे, जिन्होंने महात्मा गांधी को हमेशा पूरा आदर दिया. वो ऐसे पहले शख्स भी थे, जिन्होंने गांधीजी को राष्ट्रपिता कहा. उन्होंने हर विदेशी मंच पर गांधी को पूरा सम्मान दिया. वो जहां कहीं भी रहे, गांधी के लिए अवनत रहे. उन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा और गांधी और नेहरू के […]
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